Sunday, January 2, 2011


मीडिया में काम करने वाले एक महाशय की पत्नी ने एक बच्ची को जन्म दिया| अस्पताल ने उन्हें ४५ हजार का बिल थमाया, जिसका भुक्तान उन्होंने कर दिया| यह रकम जब उन्होंने क्लेम की तो इंश्योरेंस कंपनी के टीपीए ने ५० हजार की लिमिट होने के वाबजूद ३३ हजार रूपये ही रिईन्बर्स किये| इस इंश्योरेंस रेग्युलेटरी बॉडी इरडा ने पोल्सिधारकों के हितों की रक्षा के लिए कई इंतजाम किए हैं| कोई भी बीमा कंपनी क्लेम जा आंशिक भुगतान या पूरी तरह बेवजह ख़ारिज नहीं कर सकती| इरडा के निर्देशों के मुताबिक क्लेम नामंजूर करने की वजह बतानी ही होगी|
 कंपनी से शिकायत 
 बीमा कंपनी की ब्रांच में जाकर आप अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं| ज्यादातर कंपनियां अपने पोल्सिधारकों को कस्टमर सर्विस विभाग में फोन या ई-मेल के जरिये शिकायत करने की सुविधा देती है| अगर आपको लगता है कि कस्टमर सर्विस विभाग आपकी मदद नहीं कर रहा है, तो कंपनी के शिकायत निवारण अधिकारी से संपर्क करें|  बीमा कंपनी को तिन दिनों के भीतर लिखित में पोल्सिधारक को उसकी शिकायत दर्ज होने कि सुचना देनी होती है| शिकायत के दो हफ्ते के भीतर कंपनी को उसे सुलझाना होगा| कंपनी अगर शिकायत को ख़ारिज करती है तो इसकी वजह के साथ-साथ यह भी बताना होगा कि असंतुष्ट होने की स्थिति में पोल्सिधारक के पास क्या-क्या विकल्प है| शिकायत ख़ारिज होने के आठ हफ्ते के भीतर आप अगला कदम नहीं उठाते, तो कंपनी मन लेली है कि मामला बंद हो चूका है|

1 comment:

  1. bahot hi umda jankari mili mujhe aaj aapke blog ke mathyam se aap isi tarah likhti rhe aal the best

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