हमारी सेहत पर फोन और उसके टावर कोई असर डालते हैं या नहीं, इसे लेकर दुनिया में तरह-तरह के विचार मौजूद है | बावजूद इसके कि मोबाईल फोन को सेहत के मामले में शक से देखा जाता है, उसका इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है | हमारे देश में ज्यादा आबादी के हाथों में यह गैजेट आ चुका है | इसकी प्रमुख वजह यह रही कि इस संबंध में हुए ज्यादातर टेस्ट पक्के तौर पर यह साबित नहीं कर पाए हैं कि ये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते है | पर अपने देश में पहली बार व्यवस्थित ढंग से की जा रही रिसर्च के अब तक जो नतीजे मिले हैं, उन्हें देखते हुए मोबाईल फोन के इस्तेमाल के प्रति सावधान हो जाने की जरूरत है | मोबाईल फोन और उसके टावर से निकलने वाला रेडिएशन पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर असर डालने के अलावा शरीर की कोशिकाओं के डिफेन्स मैकेनिज्म को नुकशान पहुंचता है | मोबाईल फोन का रेडिएशन खून की क्वालिटी और दिमाग की कोशिकाओं को प्रभावित करता है | इसके पहले डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट में भी यह कहा गया है कि मोबाईल फोन का रेडिओ-फ्रिक्वेंसी फील्ड शरीर के उत्तकों को प्रभावित करता है | हालाँकि शरीर का एनर्जी कंट्रोल मैकेनिज्म आरएफ एनर्जी के कारण पैदा गर्मी को बाहर निकलता रहता है, पर शोध साबित करते हैं कि यह फालतू एनर्जी ही अनेक बीमारिओं की जड़ है | हालाँकि वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि शोधों के विरोधाभासी नतीजों के कारण अभी फ़िलहाल किसी निर्णय पर नहीं पहुंचा जा सकता | और खुद डब्ल्यूएचओ के मत में भी अभी यह पूरी तरह साबित नहीं हुआ है कि मोबाईल फोन सच में इतने बड़े विलेन हैं | पर हो सकता है कि इस तरह का असमंजस पैदा करने के पीछे बहुराष्ट्रीय मोबाईल कंपनियों का भी कोई दबाव काम कर रहा हो |

well done acha prayas hai uhi likhte rahe
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