Wednesday, January 5, 2011
ध्यान रेस ट्रेक और इंडस्ट्री पर
इसमें कोई संदेह नहीं है कि हमारे देश में खेती बुरी तरह प्रभावित है| अगर सरकार जरा भी ध्यान खेती\किसानी पर होता तो किसान दर दर कि ठोकरें नहीं खाता| यह नोबत नहीं आती कि वह ओन्ने-पोंने दामों पर अपनी जमीनें दूसरी इंडस्ट्री के हवाले कर दे और बाद में मुआवजे के लिए मारा\मारा फिरे| जब किसी क्षेत्र में ज्यादा उत्पादन होता है तो सरकार उस क्षेत्र से जुड़े लोगों को पुरस्कार देती है| पर अपने यहाँ तो जब किसान मेहनत करके जादा पैदावार कर ले तो पुरस्कार मिलने की बजाये उस पर मार पडती है| आलू जैसी फसलों की खुदाई तक का पैसा उसे नहीं मिलता साडी फसल उसे फेकनी पडती है, क्यों की सरकार ने सही कीमत देकर उससे फसल लेने की उचित व्यवस्था नहीं बनाई है| कुछ समय पहले किसान आयोग की रिपोर्ट आई थी, उसमें किसानो की समस्याएँ सुलझाने और उत्पादन में बढ़ोतरी के लिए एक रोड मेप दिया गया था| उस रिपोर्ट को सही तरीके से लागू करके खेती को फायदेमंद मनाया जा सकता है| पर कृषि मंत्रालय ने उस रिपोर्ट को रद्दी की टोकरी में फेक दिया| रिपोर्ट की प्रतियाँ इतनी कम छापी गई कि जायदा तर लोगो को मिल ही नहीं सकी| आज देश में ९०% किसानों के पास दो हेक्टेयर से कम जमीने है| और अब उनकी उस उपजाऊ जमीन का नही अधिग्रहण किया जा रहा है| जहाँ खेती होना चाहिए वहां फोर्युमला वन रेस के ट्रेक बनाए जा रहे हैं| सरकार एक और गलत ट्रेंड को बढ़ावा दे रही है| सरकारी प्रोत्साहन की वजह से देश में ५०% खेती में केमिकल फेर्टीलाइजार का इस्तेमाल हो रहा है| विदेशी कंपनियों और फेर्टीलाइजार इंडस्ट्री को बढ़ावा देनी की नियत से ही रसायनिक खेती पर जोर दिया जा रहा है| इसका असर जमीन की गुणवता पर पड़ रहा है| हमारे पास गैर\रसायनिक खेती का एक चर्चित आंध्र मोडल है जिसमे किसानों ने बेहतरीन मोटा अनाज पैदा कर दिखाया, पर उधोगो के फायदे के लिए उस मोडल की अन देखि हो रही है|
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
sarkar ka dhyan kheti or kisano pe kese aayega jb sarkar ka bet ghotalo se hi bhar jata hai wo is or thyan to jb degi na jb in netao ke bchche bhuke soige... vry gud ye jara hat k badhiya issue uthaya hai aapne carry on...
ReplyDeletechinta ka visay hai .bahut badhiya likha hai lekhane nirantar jari rakhe .
ReplyDelete