करीब तीन साल पहले समजौता एक्सप्रेस में किये गए बम विस्फोट के मामले में शामिल होने के बारे में स्वामी असीमानंद की स्वीकारोक्ति के काफी गहरे अर्थ हैं | इससे उन लोगों का आरोप सही साबित होता है जिसके अनुसार देश में हिन्दू आतंकवाद संगठित रूप लेता जा रहा है | स्वामी आसिमानंद ने मालेगांव और अजमेर ब्लास्ट में भी कुछ हिंदुत्तवादी नेताओं का हाथ होना स्वीकार किया है और कहा है कि आरएसएस के लोगों ने आतंकी हमलों की जमीन तयार की | हालाँकि कुछ लोगों को हिन्दू आतंकवाद जैसा शब्द बिल्कुल हजम नहीं होता है | उन्हें लगता है कि स्वामी आसिमानंद जैसे कुछ लोगों के कार्यों से एक राष्ट्र के तौर पर भारत की अस्मिता पर कोई संकट नहीं आता है | पर दहशत फ़ैलाने वाले ये कार्य आतंकवाद से अलग नहीं है | उग्र राष्ट्रवाद और आक्रामक हिंदुत्व के बीच की रेखा मिटाने वाली इनकी गतिविधियाँ राष्ट्र को तोड़ने का ही काम कर रही हैं | मालेगांव और समझौता एक्सप्रेस के बम धमाकों को आतंकवाद के सिवा और किस बात का नतीजा मन जाए ? भले ही ये घटनाएँ कुछ सिरफिरे हिन्दुओं के कार्यों का नतीजा हैं पर इस आधार पर इनकी अनदेखी नहीं की जा सकती | इनसे देश और समाज को वैसा ही नुकसान हो रहा है, जैसा बाहर से यहाँ हमला करने आए आतंकवादी करते हैं | इन घटनाओं में शामिल लोगों के बचाव में चाहें जो तर्क दिए जाएँ, पर अंतत इन सबका प्रेरणास्रोत आतंकवाद ही है | हिन्दू हिंसा के समर्थकों और ईट का जवाब पत्थर से देने वालों को महसूस करना चाहिए कि इस तरह वे भारत का तालिबानीकरण कर रहे हैं |

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