करीब तीन साल पहले समजौता एक्सप्रेस में किये गए बम विस्फोट के मामले में शामिल होने के बारे में स्वामी असीमानंद की स्वीकारोक्ति के काफी गहरे अर्थ हैं | इससे उन लोगों का आरोप सही साबित होता है जिसके अनुसार देश में हिन्दू आतंकवाद संगठित रूप लेता जा रहा है | स्वामी आसिमानंद ने मालेगांव और अजमेर ब्लास्ट में भी कुछ हिंदुत्तवादी नेताओं का हाथ होना स्वीकार किया है और कहा है कि आरएसएस के लोगों ने आतंकी हमलों की जमीन तयार की | हालाँकि कुछ लोगों को हिन्दू आतंकवाद जैसा शब्द बिल्कुल हजम नहीं होता है | उन्हें लगता है कि स्वामी आसिमानंद जैसे कुछ लोगों के कार्यों से एक राष्ट्र के तौर पर भारत की अस्मिता पर कोई संकट नहीं आता है | पर दहशत फ़ैलाने वाले ये कार्य आतंकवाद से अलग नहीं है | उग्र राष्ट्रवाद और आक्रामक हिंदुत्व के बीच की रेखा मिटाने वाली इनकी गतिविधियाँ राष्ट्र को तोड़ने का ही काम कर रही हैं | मालेगांव और समझौता एक्सप्रेस के बम धमाकों को आतंकवाद के सिवा और किस बात का नतीजा मन जाए ? भले ही ये घटनाएँ कुछ सिरफिरे हिन्दुओं के कार्यों का नतीजा हैं पर इस आधार पर इनकी अनदेखी नहीं की जा सकती | इनसे देश और समाज को वैसा ही नुकसान हो रहा है, जैसा बाहर से यहाँ हमला करने आए आतंकवादी करते हैं | इन घटनाओं में शामिल लोगों के बचाव में चाहें जो तर्क दिए जाएँ, पर अंतत इन सबका प्रेरणास्रोत आतंकवाद ही है | हिन्दू हिंसा के समर्थकों और ईट का जवाब पत्थर से देने वालों को महसूस करना चाहिए कि इस तरह वे भारत का तालिबानीकरण कर रहे हैं |
जनता के साथ
जनता की आवाज़...
Saturday, January 8, 2011
Friday, January 7, 2011
मोबाईल का खतरा
हमारी सेहत पर फोन और उसके टावर कोई असर डालते हैं या नहीं, इसे लेकर दुनिया में तरह-तरह के विचार मौजूद है | बावजूद इसके कि मोबाईल फोन को सेहत के मामले में शक से देखा जाता है, उसका इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है | हमारे देश में ज्यादा आबादी के हाथों में यह गैजेट आ चुका है | इसकी प्रमुख वजह यह रही कि इस संबंध में हुए ज्यादातर टेस्ट पक्के तौर पर यह साबित नहीं कर पाए हैं कि ये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते है | पर अपने देश में पहली बार व्यवस्थित ढंग से की जा रही रिसर्च के अब तक जो नतीजे मिले हैं, उन्हें देखते हुए मोबाईल फोन के इस्तेमाल के प्रति सावधान हो जाने की जरूरत है | मोबाईल फोन और उसके टावर से निकलने वाला रेडिएशन पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर असर डालने के अलावा शरीर की कोशिकाओं के डिफेन्स मैकेनिज्म को नुकशान पहुंचता है | मोबाईल फोन का रेडिएशन खून की क्वालिटी और दिमाग की कोशिकाओं को प्रभावित करता है | इसके पहले डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट में भी यह कहा गया है कि मोबाईल फोन का रेडिओ-फ्रिक्वेंसी फील्ड शरीर के उत्तकों को प्रभावित करता है | हालाँकि शरीर का एनर्जी कंट्रोल मैकेनिज्म आरएफ एनर्जी के कारण पैदा गर्मी को बाहर निकलता रहता है, पर शोध साबित करते हैं कि यह फालतू एनर्जी ही अनेक बीमारिओं की जड़ है | हालाँकि वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि शोधों के विरोधाभासी नतीजों के कारण अभी फ़िलहाल किसी निर्णय पर नहीं पहुंचा जा सकता | और खुद डब्ल्यूएचओ के मत में भी अभी यह पूरी तरह साबित नहीं हुआ है कि मोबाईल फोन सच में इतने बड़े विलेन हैं | पर हो सकता है कि इस तरह का असमंजस पैदा करने के पीछे बहुराष्ट्रीय मोबाईल कंपनियों का भी कोई दबाव काम कर रहा हो |
Thursday, January 6, 2011
हत्या,सच और न्याय
बिहार में भाजपा विधायक राजकिशोर केसरी की हत्या के बाद इस पूरे मामले की जो सूरत गढ़ी गई, वह कई गंभीर सवाल खड़े करती है | तब जबकि एक तरफ राज्य सरकार ने मामले को संगीन बताया और फौरी तौर पर इसके जाँच के आदेश दिए, यह बात सरकार में शामिल लोगों की तरफ से बढ़-चढ़कर बताना कि केसरी क्षेत्र में काफी लोकप्रिय थे और उन्हें पूर्णिया की जनता ने चार बार विधायक चुनकर भेजा था, लिहाजा अगर किसी का चरित्र संदिग्थ है तो उस महिला का जिसने विधायक की चाकू घोंपकर हत्या की ये बातें कहीं से भी गले से नहीं उतरती है | केसरी चूँकि भाजपा विधायक थे, इसीलिए इस घटना के बाद राज्य में सतारूढ़ जदयू-भाजपा गठबंधन में सबसे मुश्किल स्तिथि जाहिर रूप से भाजपा की ही बनी | उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी की इस घटना के बाद अतिरिक्त सक्रियता और कुछ घंटे के अन्दर ही मीडिया के सामने यह कह देना कि महिला के विधायक पर यौन उत्पीडन के आरोप गंभीर नहीं हैं | इस आरोप को लेकर न तो कोई मामला लंबित है और न ही किसी स्तर पर कोई लिखित शिकायत दर्ज है | केसरी जनप्रिय नेता थे और भाजपा के साथ उनका साथ पुराना और विश्वसनीय था | किसी सूबे की सरकार में वरीयता में दूसरे नंबर की जवाबदेही संभाल रहे नेता का इस तरह का बयान कम से कम एक तटस्थ प्रतिक्रिया तो नहीं ही कही जा सकती | जदयू-भाजपा गंठबंधन को सूबे की जनता ने जब शासन के लिए दोबारा चुना तो उसके पीछे एक बड़ी आशा राज्य में सुशासन की स्थापना भी थी | बेशक निजी रूप से मुख्यमंत्री नितीश कुमार सत्ता में रहते हुए अपने बयान और क्रियाकलाप में अपेक्षित रूप से कम विवादास्पद रहे हैं | लेकिन विधायक हत्या मामले में सरकार और उसमे शामिल एक दल की छवि दांव पर लगी है | न्याय की यह सार्वदेशिक और सार्वकालिन मर्यादा है कि न्याय होने से ज्यादा जरूरी है कि न्याय होते हुए भी दिखे | इस मामले में कम से कम अब तक के घटनाक्रम में तो न्याय की यह मर्यादा पूरी होती नहीं दिखती | सरकार और उनके लोगों की छवि और सुरक्षा अगर बहुत मायने रखती है तो यह कहीं से सिद्ध नहीं होता कि यह सब नागरिक सुरक्षा और खासकर एक महिला कि छवि को बगैर किसी पुष्ट आधार के दाव पर लगाकर ही पूरा हो | वैसे भी जनतांत्रिक मर्यादा किसी सरकार और उनके हिस्से-पुर्जों को जनता के प्रति ही अंतिम रूप से उत्तरदायी ठहराती है | लिहाजा, केसरी हत्याकांड की जब तक जाँच पूरी नहीं हो जाती तब तक सरकारी पक्ष तटस्थ मर्यादा का सख्ती से पालन करे, यह चुनौती भी है और यही अपेक्षित भी | जिस तरह यह हत्या हुई, उसमे कम से कम पहली नजर में तो यह लगता है कि इसके पीछे की वजह मामूली नहीं होगी |
Wednesday, January 5, 2011
ध्यान रेस ट्रेक और इंडस्ट्री पर
इसमें कोई संदेह नहीं है कि हमारे देश में खेती बुरी तरह प्रभावित है| अगर सरकार जरा भी ध्यान खेती\किसानी पर होता तो किसान दर दर कि ठोकरें नहीं खाता| यह नोबत नहीं आती कि वह ओन्ने-पोंने दामों पर अपनी जमीनें दूसरी इंडस्ट्री के हवाले कर दे और बाद में मुआवजे के लिए मारा\मारा फिरे| जब किसी क्षेत्र में ज्यादा उत्पादन होता है तो सरकार उस क्षेत्र से जुड़े लोगों को पुरस्कार देती है| पर अपने यहाँ तो जब किसान मेहनत करके जादा पैदावार कर ले तो पुरस्कार मिलने की बजाये उस पर मार पडती है| आलू जैसी फसलों की खुदाई तक का पैसा उसे नहीं मिलता साडी फसल उसे फेकनी पडती है, क्यों की सरकार ने सही कीमत देकर उससे फसल लेने की उचित व्यवस्था नहीं बनाई है| कुछ समय पहले किसान आयोग की रिपोर्ट आई थी, उसमें किसानो की समस्याएँ सुलझाने और उत्पादन में बढ़ोतरी के लिए एक रोड मेप दिया गया था| उस रिपोर्ट को सही तरीके से लागू करके खेती को फायदेमंद मनाया जा सकता है| पर कृषि मंत्रालय ने उस रिपोर्ट को रद्दी की टोकरी में फेक दिया| रिपोर्ट की प्रतियाँ इतनी कम छापी गई कि जायदा तर लोगो को मिल ही नहीं सकी| आज देश में ९०% किसानों के पास दो हेक्टेयर से कम जमीने है| और अब उनकी उस उपजाऊ जमीन का नही अधिग्रहण किया जा रहा है| जहाँ खेती होना चाहिए वहां फोर्युमला वन रेस के ट्रेक बनाए जा रहे हैं| सरकार एक और गलत ट्रेंड को बढ़ावा दे रही है| सरकारी प्रोत्साहन की वजह से देश में ५०% खेती में केमिकल फेर्टीलाइजार का इस्तेमाल हो रहा है| विदेशी कंपनियों और फेर्टीलाइजार इंडस्ट्री को बढ़ावा देनी की नियत से ही रसायनिक खेती पर जोर दिया जा रहा है| इसका असर जमीन की गुणवता पर पड़ रहा है| हमारे पास गैर\रसायनिक खेती का एक चर्चित आंध्र मोडल है जिसमे किसानों ने बेहतरीन मोटा अनाज पैदा कर दिखाया, पर उधोगो के फायदे के लिए उस मोडल की अन देखि हो रही है|
Tuesday, January 4, 2011
साइलेंट किलर है रंग-बिरंगे पेंट
बाजारों में बिकने वाले ज्यादातर सजावटी पेंट सेहत के लिए खतरनाक है| खासतौर से बच्चों और महिलाओं के लिए यह साइलेंट किलर का कम कर रहे हैं| इसकी वजह है ज्यादातर ब्रैंड के पेंट में तय मानकों से ज्यादा लेड का इस्तेमाल| यह खुलासा कंस्यूमर असोसिएशन ऑफ़ इंडिया कि हल की स्टडी से हुआ है| इस स्टडी के तहत करीब सभी ब्रैंड के पेंट के सैंपल लिए गए थे| इसके बाद सरकारी लैब में इनकी जाँच कराई गई| सैंपल की जाँच में ८३.८७ पर्सेंट सैंपल में लेड की मात्रा तय मानकों से ६०० से लेकर १००० पीपीएम से ज्यादा लेड पाया गया| इसमें प्लास्टिक पेंट, सजावटी पेंट के सैंपल उठाए गए थे|
ब्यूरो ऑफ़ इंडियन स्टैण्डर्ड पेंट में १००० पीपीएम लेड के इस्तेमाल की अनुमति देता है| विश्व स्वास्थ्य संगठन और दूसरी अंतर्राष्ट्रीय संस्थायों ने पहले इसके लिए ६०० पीपीएम का स्टैण्डर्ड निर्धारित किया था, लेकिन इसके खतरनाक परिणामों को देखते हुए अब इसकी मानक मात्रा को घटाकर ९० पीपीएम कर दिया है| बावजूद इसके देश की पेंट इंडस्ट्री इसे सुरक्षित बनाने की तरफ अग्रसर नहीं हो रही| पेंट इंडस्ट्री की लापरवाही का ही नतीजा है कि १२ साल से कम उम्र के देश के ६३.५ पर्सेंट बच्चों के रक्त में लेड की मात्रा १० माइक्रोग्राम प्रति डेसी लीटर से ज्यादा है| ऐसे में बच्चों में कई गंभीर समस्याएँ आ सकती है| मसलन आईक्यू कमजोर होना, लर्निग डिसऑर्डर और व्यावहारिक समस्याएँ उत्पन्न होना आम है|
ऐसे में जरूरत है तो हमे जागरूक होने की इन सजावटी पेंट्स का इस्तेमाल जरा सोच समझकर करना होगा नहीं तो इनके खतरनाक प्रभाव हमारे बच्चों में ना पड़ जाएँ|
ब्यूरो ऑफ़ इंडियन स्टैण्डर्ड पेंट में १००० पीपीएम लेड के इस्तेमाल की अनुमति देता है| विश्व स्वास्थ्य संगठन और दूसरी अंतर्राष्ट्रीय संस्थायों ने पहले इसके लिए ६०० पीपीएम का स्टैण्डर्ड निर्धारित किया था, लेकिन इसके खतरनाक परिणामों को देखते हुए अब इसकी मानक मात्रा को घटाकर ९० पीपीएम कर दिया है| बावजूद इसके देश की पेंट इंडस्ट्री इसे सुरक्षित बनाने की तरफ अग्रसर नहीं हो रही| पेंट इंडस्ट्री की लापरवाही का ही नतीजा है कि १२ साल से कम उम्र के देश के ६३.५ पर्सेंट बच्चों के रक्त में लेड की मात्रा १० माइक्रोग्राम प्रति डेसी लीटर से ज्यादा है| ऐसे में बच्चों में कई गंभीर समस्याएँ आ सकती है| मसलन आईक्यू कमजोर होना, लर्निग डिसऑर्डर और व्यावहारिक समस्याएँ उत्पन्न होना आम है|
ऐसे में जरूरत है तो हमे जागरूक होने की इन सजावटी पेंट्स का इस्तेमाल जरा सोच समझकर करना होगा नहीं तो इनके खतरनाक प्रभाव हमारे बच्चों में ना पड़ जाएँ|
Monday, January 3, 2011
यूजीसी अफसर को ठगा
बेटे को डॉक्टर बनाने कि चाह में दी साढ़े १२ लाख रूपये कैश
स्टुडेंट्स को ठगने वाले रैकेट का शिकार इस बार राजधानी के एक सरकारी अफसर बने है| उनसे हुई लाखों कि ठगी में मुंबई पुलिस ने एक मुलजिम को गिरफ्तार किया है, लेकिन रैकेट का मास्टरमाइंड फरार है| संतान का भविष्य सँवारने की जद्दोजहद कर रहे पैरंट्स के सपनों को ठगने में जालसाज लगातार कामयाब हो रहे हैं| राजौरी गार्डेन में रहने वाले राजकुमार साहनी यूजीसी में अधिकारी हैं और उनकी पत्नी नीलाम सरकारी स्कूल में टीचर हैं| दोनों अपने एकमात्र बेटे को डॉक्टर बनाना चाहते हैं| उन्होंने एक अख़बार में एमडी, एमएस, और एमडीस में एडमिसन गाइडेंस के लिए विज्ञापन देखा| ओएसिस एजुकेशनल सर्विस की ओर से दिए गए इस विज्ञापन में लिखें सेल नंबर पर साहनी ने कॉल की| उधर से साहिल और मिशन पटेल के युवकों से उनकी बात हुई| बातचीत के बाद साहनी दंपती को भरोशा हो गया|
मिशन पटेल ने साहनी दंपती को मुंबई बुलाया कफ परेड में स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ३० वें माले पर पटेल का दफ्तर देखकर साहनी खासे प्रभावित हुए| पटेल ने उन्हें बताया कि अहमदनगर के प्रवर मेडिकल कॉलेज में डेंटल कोर्स में वह मिनिस्टर के कोटे से एडमिसन करा सकता है| इस बातचीत के दौरान उसके पास लगातार फोन आ रहे थे, jinhe वह एडमिसन होने पर बधाइयां दे रहा था| उनसे इसके लिए साढ़े १२ लाख रूपये कैश और साढ़े चार लाख का बैंक ड्राफ्ट देने के लिए कहा| साहनी दंपती को भ्रिसा दिलाने के लिए वह उन्हें अहमदनगर में मेडिकल कॉलेज में साथ ले गया वहां पटेल उन्हें इस तरह घुमाता रहा कि साहनी दंपती को उस पर यकीन हो गया| उन्होंने उसे दो किस्तों में साढ़े १२ लाख रूपये कैश दिए| इनकी रसीद उन्हें मिल गई|
कुछ दिनों पहले पटेल ने उन्हें साढ़े चार लाख रूपये का बैंक ड्राफ्ट लेकर अहमदनगर आने के लिए कहा| साहनी दंपती बेटे और उसकी जरूरत का सामान खरीद कर मेडिकल कॉलेज में पहुँच गए| वहां उन्हे बताया गया कि एडमिसन १० दिन बाद होगा| अब उन्हें संदेह हो गया| उन्होंने केनरा बैंक में फोन कर ड्राफ्ट की पेमेंट रुकवा दी| बाद में जालसाजी का खुलासा होने पर उन्होंने मुंबई के जोइंट पुलिस कमिशनर हिमांशु रॉय से मुलाकात की|
इसके बाद कफ परेड पुलिस स्टेशन में ओएसिस एजुकेशन सर्विस के संचालको मिशन पटेल और साहिल के खिलफ एएफआईआर दर्ज की| इन्स्पेक्टर विलास की टीम ने साहिल को गिरफ्तार कर लिया| तहकीकात में पता चला कि उसका असली नाम मुहम्मद इस्माइल है| मिशन पटेल का असली नाम मुहम्मद अतिकुर्रमान है| दोनों यूपी के हैं|
मेरी जनता से यही अपील है कि वो इस तरह के विज्ञापनों में न आए इस तरह के विज्ञापन बहोत ही आकर्षक होते है तो इनसे दूर ही रहे लोगों को अपनी म्हणत पर यकीन होना चाहिए ना कि इन जालसाजो पर|
स्टुडेंट्स को ठगने वाले रैकेट का शिकार इस बार राजधानी के एक सरकारी अफसर बने है| उनसे हुई लाखों कि ठगी में मुंबई पुलिस ने एक मुलजिम को गिरफ्तार किया है, लेकिन रैकेट का मास्टरमाइंड फरार है| संतान का भविष्य सँवारने की जद्दोजहद कर रहे पैरंट्स के सपनों को ठगने में जालसाज लगातार कामयाब हो रहे हैं| राजौरी गार्डेन में रहने वाले राजकुमार साहनी यूजीसी में अधिकारी हैं और उनकी पत्नी नीलाम सरकारी स्कूल में टीचर हैं| दोनों अपने एकमात्र बेटे को डॉक्टर बनाना चाहते हैं| उन्होंने एक अख़बार में एमडी, एमएस, और एमडीस में एडमिसन गाइडेंस के लिए विज्ञापन देखा| ओएसिस एजुकेशनल सर्विस की ओर से दिए गए इस विज्ञापन में लिखें सेल नंबर पर साहनी ने कॉल की| उधर से साहिल और मिशन पटेल के युवकों से उनकी बात हुई| बातचीत के बाद साहनी दंपती को भरोशा हो गया|
मिशन पटेल ने साहनी दंपती को मुंबई बुलाया कफ परेड में स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ३० वें माले पर पटेल का दफ्तर देखकर साहनी खासे प्रभावित हुए| पटेल ने उन्हें बताया कि अहमदनगर के प्रवर मेडिकल कॉलेज में डेंटल कोर्स में वह मिनिस्टर के कोटे से एडमिसन करा सकता है| इस बातचीत के दौरान उसके पास लगातार फोन आ रहे थे, jinhe वह एडमिसन होने पर बधाइयां दे रहा था| उनसे इसके लिए साढ़े १२ लाख रूपये कैश और साढ़े चार लाख का बैंक ड्राफ्ट देने के लिए कहा| साहनी दंपती को भ्रिसा दिलाने के लिए वह उन्हें अहमदनगर में मेडिकल कॉलेज में साथ ले गया वहां पटेल उन्हें इस तरह घुमाता रहा कि साहनी दंपती को उस पर यकीन हो गया| उन्होंने उसे दो किस्तों में साढ़े १२ लाख रूपये कैश दिए| इनकी रसीद उन्हें मिल गई|
कुछ दिनों पहले पटेल ने उन्हें साढ़े चार लाख रूपये का बैंक ड्राफ्ट लेकर अहमदनगर आने के लिए कहा| साहनी दंपती बेटे और उसकी जरूरत का सामान खरीद कर मेडिकल कॉलेज में पहुँच गए| वहां उन्हे बताया गया कि एडमिसन १० दिन बाद होगा| अब उन्हें संदेह हो गया| उन्होंने केनरा बैंक में फोन कर ड्राफ्ट की पेमेंट रुकवा दी| बाद में जालसाजी का खुलासा होने पर उन्होंने मुंबई के जोइंट पुलिस कमिशनर हिमांशु रॉय से मुलाकात की|
इसके बाद कफ परेड पुलिस स्टेशन में ओएसिस एजुकेशन सर्विस के संचालको मिशन पटेल और साहिल के खिलफ एएफआईआर दर्ज की| इन्स्पेक्टर विलास की टीम ने साहिल को गिरफ्तार कर लिया| तहकीकात में पता चला कि उसका असली नाम मुहम्मद इस्माइल है| मिशन पटेल का असली नाम मुहम्मद अतिकुर्रमान है| दोनों यूपी के हैं|
मेरी जनता से यही अपील है कि वो इस तरह के विज्ञापनों में न आए इस तरह के विज्ञापन बहोत ही आकर्षक होते है तो इनसे दूर ही रहे लोगों को अपनी म्हणत पर यकीन होना चाहिए ना कि इन जालसाजो पर|
Sunday, January 2, 2011
मीडिया में काम करने वाले एक महाशय की पत्नी ने एक बच्ची को जन्म दिया| अस्पताल ने उन्हें ४५ हजार का बिल थमाया, जिसका भुक्तान उन्होंने कर दिया| यह रकम जब उन्होंने क्लेम की तो इंश्योरेंस कंपनी के टीपीए ने ५० हजार की लिमिट होने के वाबजूद ३३ हजार रूपये ही रिईन्बर्स किये| इस इंश्योरेंस रेग्युलेटरी बॉडी इरडा ने पोल्सिधारकों के हितों की रक्षा के लिए कई इंतजाम किए हैं| कोई भी बीमा कंपनी क्लेम जा आंशिक भुगतान या पूरी तरह बेवजह ख़ारिज नहीं कर सकती| इरडा के निर्देशों के मुताबिक क्लेम नामंजूर करने की वजह बतानी ही होगी|
कंपनी से शिकायत
बीमा कंपनी की ब्रांच में जाकर आप अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं| ज्यादातर कंपनियां अपने पोल्सिधारकों को कस्टमर सर्विस विभाग में फोन या ई-मेल के जरिये शिकायत करने की सुविधा देती है| अगर आपको लगता है कि कस्टमर सर्विस विभाग आपकी मदद नहीं कर रहा है, तो कंपनी के शिकायत निवारण अधिकारी से संपर्क करें| बीमा कंपनी को तिन दिनों के भीतर लिखित में पोल्सिधारक को उसकी शिकायत दर्ज होने कि सुचना देनी होती है| शिकायत के दो हफ्ते के भीतर कंपनी को उसे सुलझाना होगा| कंपनी अगर शिकायत को ख़ारिज करती है तो इसकी वजह के साथ-साथ यह भी बताना होगा कि असंतुष्ट होने की स्थिति में पोल्सिधारक के पास क्या-क्या विकल्प है| शिकायत ख़ारिज होने के आठ हफ्ते के भीतर आप अगला कदम नहीं उठाते, तो कंपनी मन लेली है कि मामला बंद हो चूका है|
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