Monday, December 27, 2010
जन का हित कहाँ?
जनहित के अर्थ और उद्देशय पर सरकार और न्यायलय का नजरिया प्रायं परस्पर विरोधी हो जाया करता है मुलायम सरकार में यही होता था मायावती सरकार में भी यही हो रहा है सरकार जिस मामलें को जनहित से जुदा समझती है अदालत को उसमें जनता के हित जेसी कोई बात नजर ही नहीं आती है इस खबरची को मिली जानकारी के अनुसार पन्ना लाल वाराणसी में संयुक्त क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक में बड़े नामवर शाखा प्रबंधक रहे है २२ अक्टूबर २००१ में एंटी करपसन विभाग की टीम ने इन्हें एक हजार रूपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड लिया था इनके खिलाफ अदालत में आज भी मुकदमा चल रहा है लेकिन सरकार के मन में एक दिन अपने न जाने किस शुभचिंतक की यह बात जम गए की यदि इस मामले को अदालत से वापस ले लिया जाए तो सूबे के लोगों का बहुत भला हो सकता है सो उनसे झट अदालत में एक दरख्वास्त दाखिल करके गुजारिश की की जनहित में इस मुकदमे को वापस लेने का फेसला किया गया लेकिन अदालत तो आखिर अदालत होती है और अदालत ने जनहित के भले के लिए सरकार की इस अपील को ख़ारिज कर दिया| अब आप लोग ही बताएं की इसमें आप को जन का हित कहाँ दीखता है
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment