Friday, December 31, 2010

खाद के लिए मारामरी

मुख्मंत्री मायावती ने अधिकारिओं को निर्देश दिया है कि रबी की फसल की बुआई के लिए खाद-बीज की कमी न होने दें| इसके बावजूद पूर्वांचल में खाद के लिए भयंकर मारामारी है| खाद की तस्करी भी धडल्ले से जारी है|
किसान पर प्रकृति और शासन का कहर जारी है| सूखे के चलते धन की फसल मारी गई| अब रबी की बुआई के समय डीएपी की कमी से किसान परेशान है| खाद के लिए मारामारी जारी है| सरकारी दावे की पोल फिर से खुल गई है| खाद के लिए किसान कामकाज छोड़ लाइन में लग अपनी अपनी बारी का इंतजार खाद गोदामों पर कर रहे है| महिलाओं की भी लंबी कतार लग रही है| घंटों बाद भी उन्हें खली हाथ लौटना पड़ रहा है| उग्र किसानों को नियंत्रित करने के liye पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है| किसानों का गुस्सा फूट रहा है| वे सड़क पर उतर कर विरोध जता रहें हैं| सूखे में विशेषकर पूर्वांचल में खाद की कमी को गंम्भीरता से लेते हुए मुख्मंत्री मायावती ने अधिकारिओं को निर्देशित किया है कि रबी कि फसल कि बुआई के लिए खाद-बीज की कमी न होने दें| कोताही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही हो| उधर पूर्वांचल में खाद की तस्करी जारी है| नेपाल में भारतीय खाद धडल्ले से भेजी जा रही है| ऐसे रोक पाने में पुलिस नाकाम हैं|
कृषि एवं सहकारिता विभाग के अधिकारी भले ही भरपूर खाद उपलब्धता का दावा कर रहे हों, लेकिन हकीकत यह है की खाद के लिए हर जिलों  में मारामारी मची है|  
माया जी को मेरी सलहा है कि मुख्मंत्री जी आपके राज्ये में आपसे भी बड़े बड़े मायावी है तो उन अधिकारिओं की मायाजाल से निकल कर कुछ रियल में करने का वक्त है वरना सत्ता को जाते देखती रह जाएँगी|

Thursday, December 30, 2010

ऐसे में कौन उनकी बात सुनेगा

कुछ सालों पहले तक यह धारणा थी कि देश में सक्रिय तमाम गैर-सरकारी संगठन(एनजीओ) जनता से जुड़े मुद्दों की गहराई से पड़ताल करते हैं और यथासंभव उस संदर्भ में सार्थक कार्य करते है| इस प्रक्रिया में वे खुद तो समस्या के समाधान की कोशिश करते ही है, अपने सर्वेक्षणों, अध्ययनों और शोधों से सरकार को भी सुझाव देते रहते हैं कि उसे किस तरह के कार्यक्रम शुरू करने चाहिए| उस दौरान यह भी देखा जाता था कि कुछ गंभीर बोद्धिक लोग इन संगठनों से जुड़े रहते थे और समस्या के विभिन्न पहलुओं का उपयोगी विशलेषण प्रस्तुत करते थे| लेकिन जैसे तमाम सरकारी संस्थाओं की भूमिका और छवि बदलती गई है, वैसे ही एनजीओ की छवि भी अब बदल चुकी है| ऐसा नहीं कि देश के सभी एनजीओ किसी गड़बड़ी के शिकार हैं, लेकिन अधिकांश की रिपोर्ट चिंताजनक है| अब ताजा समाचार यह है कि देश के ८७ एनजीओ पैसे की हेराफेरी के मामलें में फंस गए है| इनमें से ४६ के खाते सील भी कर दिए गए हैं| गौरतलब है कि देश के तमाम एनजीओ ऐसे हैं, जिन्हें विदेशों से सहायता राशि प्राप्त होती है| इन पैसों के उपयोग को लेकर सवाल उठते रहते है| अब जाँच के बाद इस धन के दुरुप्रयोग की पुष्टि वास्तव में चिंताजनक मसला है| एनजीओ आदर्श व सिद्धांत की बातें करते थकते नहीं| ऐसे में उनका अपना दमन ही दागदार हो, तो फिर कौन उनकी बातों को गंम्भीरता से लेगा| ऐसे में शेष संगठनों को इससे सबक लेते हुए अपने कार्यों में पारदशिर्ता लाने की जरूरत कोशिश करनी चाहिए|

Wednesday, December 29, 2010

उतर प्रदेश में बागबानी कॉल सेंटर

फल या अन्य नकदी उत्पाद उगने वाले किसान ज्यादातर इस बात को लेकर परेसान होते है कि वे अपनी फसल के लिए कौन  सा बेहतर बीज लें या फसलों में कौन सा कीटनाशक दवाई डालें| इन्हें अब अपनी फल संबंधी जानकारी पाने के लिए इधर उधर नहीं भटकना पड़ेगा| वे घर बेठे ही फोन पर फलों से जुडी तमाम बैटन कि जानकारी में सकते है| मसलन फलों को कब बोया जाना है| फलों में कौन सी कीटनाशक दवा का प्रयोग करें| इन सब जन्करिओं के लिए केन्द्रीय उपोषण बागबानी संसथान में एक कॉल सेंटर खोल रहा है| जहाँ फलों के किसानों कि उनकी समस्याओं का समाधान फोन पर मिलेगा| इस कॉल सेंटर के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एस के शुक्ला होंगे और इस सेंटर का नाम मीडिया संसाधन केंद्र होगा| यह देश का पहला कॉल सेंटर होगा, जहाँ किसान फलों से संबंधित बीमारी, बिक्री और उपज के बारे में जानकारी ले सकेगा| शुरुआत  में यह सेवा हफ्तें में एक दिन शुक्रवार को सुबह दस बजे से शाम चार बजे के बीच उपलब्ध रहेगी|
 यो ये था आज का मेरा जनता के साथ.....

Tuesday, December 28, 2010

स्वास्थ्य से जुड़े १७ कार्यदल बनाएगा केंद्र

हा सुनने में तो यही आ रह है की अब देश में लोगों की सेहत बेहतर बनाने के लिए सरकार विभिन्न कार्यदलों की सलाह लेने का विचार कर रहा है केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सेहत से जुड़े १७ विभिन्न मुद्दों को चिन्हित किया है जिन्हें सुधारकर आम जनता को सेहतमंद रखा जा सकता है स्वास्थ्य राज्यमंत्री दिनेश त्रिवेदी की पहल पर किए गए इस नई योजना पसर स्वास्थ्य सेवा से जुड़ें तमाम अधिकारीयों की बैठक हुई|
 प्रधानमंत्री के सलाहकार सेम पित्रोदा ने देश में सेहत से जुड़ें १७ मुद्दों की पहचान की है| स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी के कहा की स्वास्थ्य सेवा से जुड़ें तमाम सरकारी और निज्जी संस्थाओं के अधिकारिओं ने एक बैठक में इन मुद्दों पर बात की है| बैठक के अंत में सेम पित्रिदा ने १७ सबसे अहम मुद्दों को चिन्हित कर स्वास्थ्य मंत्री को अपनी  एक रिपोर्ट सोपी है| इनमे स्वास्थ्य जागरूकता एवं सिक्षा, पिने योग्य पानी, स्वास्थ्य बिमा, मोबाईल हॉस्पिटल यूनिट  और टेलीमेडिसिन जेस्से मामलें अहम है| राज्यमंत्री ने ये भी कहा है की सभी १७ मामलों पर बहुत जल्द अलग अलग कार्यदल के  सदस्यों को चार पन्नों में सलाह देने को कहा गया है|
 मेरी तो यही प्रार्थना  है की ये सब फिर कही अन्य मामलों की तरह केवल पन्नों में ही ना रह जाए कुछ तो हकीकत में भीं हो ताकि लोगों का कुछ भला हो जाए| 

Monday, December 27, 2010

janta ki awaz: जन का हित कहाँ?

janta ki awaz: जन का हित कहाँ?

जन का हित कहाँ?

जनहित के अर्थ और उद्देशय पर सरकार और न्यायलय का नजरिया प्रायं परस्पर विरोधी हो जाया करता है मुलायम सरकार में यही होता था मायावती सरकार में भी यही हो रहा है सरकार जिस मामलें को जनहित से जुदा समझती है अदालत को उसमें जनता के हित जेसी कोई बात नजर ही नहीं आती है इस खबरची को मिली जानकारी के अनुसार पन्ना लाल वाराणसी में संयुक्त क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक में बड़े नामवर शाखा प्रबंधक रहे है २२ अक्टूबर २००१ में एंटी करपसन विभाग की टीम ने इन्हें एक हजार रूपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड लिया था इनके खिलाफ अदालत में आज भी मुकदमा चल रहा है लेकिन सरकार के मन में एक दिन अपने न जाने किस शुभचिंतक की यह बात जम गए की यदि इस मामले को अदालत से वापस ले लिया जाए तो सूबे के लोगों का बहुत भला हो सकता है सो उनसे झट अदालत में एक दरख्वास्त दाखिल करके गुजारिश की की जनहित में इस मुकदमे को वापस लेने का फेसला किया गया लेकिन अदालत तो आखिर अदालत होती है और अदालत ने जनहित के भले के लिए सरकार की इस अपील को ख़ारिज कर दिया| अब आप लोग ही बताएं की इसमें आप को जन का हित कहाँ दीखता है

क्या पता है राष्ट्रमंडल में खेलों में हुई थी १०९ मोतें

राष्ट्रमंडल खेलों से जुडी विभिन्न परियोजनाओ के दोरान लोगों की मोत की बात को स्वीकार करते हुए सर्कार ने कहा की राष्ट्रमंडल खेल परियोजना निर्माण कार्य के दोरान १०९ मजदूरों की मोत हुई लोकसभा को श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री हरीष रावत ने बताया साल २००१ से २००५ तक राष्ट्रमंडल राष्ट्रमंडल खेल परियोजना के प्रथम चरण के दोरान ५५ मजदूरों की मोत हुई जबकि २००६ के बाद दिव्तीय चरण में ५४ मजदूर मरे गए इनमें से प्रथम चरण के तहत श्रम कल्याण कोष के बनने से पहले १८ लोगों की मोत हुई जिन्हें मुआवजा दिए जाने का उल्लेख नहीं किया गया जबकि इसी चरण में चार मज्दोरों के आश्रितों की पहचान नहीं की जा सकी  तथा शेष के आश्रितों को मुआवजा प्रदान कर  दिया गया सरकारी आंकड़ो के अनुसार दुसरे चरण में छः लोगों के आश्रितों के पहचान नहीं हुई जबकि शेष संबंधियों को मुआवजा दे दिया गया मंत्री ने रामसुंदर दस, भास्कर राव बापुराव पाटिल, भिसम्संकर उर्फ़ कुशन तिवारी, राधा मोहन सिंह, चौधरी लाल सिंह, एकनाथ महादेव गायकवाड, और मधु यास्खी के प्रस्न के लिखित उतर में कहा की  राष्ट्रमंडल खेल परियोजन से जुड़ें डीएआरसी   सथलों पर छः लोगों की मोत हुई
ये केसा खेल था जो लोगो के जीवन के साथ हुआ इन खेलों ने सिर्फ घोटाले दिखाई और लाई उन मासूम १०९ मजदूरों की मोत और मीडिया सिर्फ उन घोटालों की बात करती है उन मजदूरों की मोत को सामने कोन लेगा इस लिए ब्लॉग के माध्यम से में इन चीजों को सामनें लाने की कोसिस भर कर रहीं हूँ.............  

Wednesday, December 22, 2010

लक्ष्मी नगर का दुःख

 लक्ष्मी नगर में विकास मार्ग स्थित एक चार मंजिला ईमारत में दरार पड़ने व एक तरफ झुकने से इलाके में हरकंप मच गया/ सुरझा के लिहाजा से यह इमारत शील कर दी है इमारत के चारो ओर घेरा बनाकर पुलिस व सुरझा बलों को तैनात कर दिया गया है / ना जाने कितने बेकसूरों की जान चली गई कितने तो घर से बेघर हो गए इस इमारत में ज्यादा तो मजदूर थे जो पुरे दिन काम करने के बाद शाम में अपने घर आये थे उन्हें क्या पता की उनके मौत का इन्तजार हो रहा है और वो कल की सुबह नही देख पायेगे उस इमारत में रहने वाले ज्यादातर मजदुर बिहार के थे जो इतने दूर अपने घर से आये थे अपनों को छोड़ कर कुछ काम कर के पैसे कमाने उन्हें क्या पता था की पैसे कमाने का ये सिला मिलेगा इस चार मंजिला इमारत में कोचिंग विज्ञापन एजेंसिया  भी थी इस इमारत के गिरने से आस पास के घरो में देह्सत सी फैल गई है उनके दिल में एक अजीब सा डर बैठ गया है /

Friday, December 3, 2010

dwab ki rajneeti

कांग्रेस ने अपने सिपाहियों का बलिदान तो दे दिया ,लेकिन सहयोगियों का बलिदान लेने में वह हिचकिचा रही है कांग्रेस को यह जान लेना चाहिए की सरकार की कीमत पर यदि उसने भ्रष्टाचार से सौदा किया तो उसे भविष्य में इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी आज ऐसा ही लग रहा है की करुनानिधि के दबाव के चलते कांग्रेस राजा के खिलाफ कोई एक्शन नहीं ले पा रही है अब यही मन जायेगा की वह कोई कदम उठाएगी तो भी उस के पीछे कोई समझोते का खेल होगा 

ओबामा और भारत

अब हमें ओबामा की यात्रा का सकारात्मक पक्ष देना है ,की वह यह है सबसे अच्छी बात है की ओबामा भारत आये और पाकिस्तान नहीं गये / पाकिस्तान के मुंह पर यह करारा तमाचा है यदि पाकिस्तान के खिलाफ अमेरिका आगे भी यही रुख अख्तियार करेगा तो वह और भी अच्छी बात होगी
बर्फी के सब रस ले गयो ओबामा जी
ओबामा की यात्रा के दोरान करोडो रूपया खर्च बी हुआ और गरीब जनता को पता बी नही चला इसी लिए तो बर्फी के सब रस ले गयो ओबामा,,,,, और चीनी बाबु तो लुटिया ही डूबा के चल दिए आखिर ये कब तक होगा भाई................अ भाई कोई है,,,,,,,,,, जो मेरी आवाज सुन सके
ओबामा जी ने तो लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को एक स्वर्ण पट्टिका भी भेज दी जिसमे अमेरका की संविधान की प्रस्तावना लिखी हुई है ओबामा की और से संसद के एक अधिकारी मीरा को ये  पट्टिका  की अमेरका के  संविधान की प्रस्तावना प्रशिद्ध शब्द "हम लोग" ..... वी द पीपल से शुरू होती है